Hey..check out our new app Download

Full mean of Seven Marriage promises (Hindi)

11 May, 2019

blog-img

सात फेरे और सात वचन

सनातन धर्म में अंको का बहुत महत्व है, हमारी संस्कृति में सात के अंक को आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना गया है। माना जाता है कि संगीत के सुर भी सात हैं सुंदर संगीत सातों सुरों के मिलने से ही बनता है जो अपनी धुन से कानों में रस घोल देता है जिससे मन आंनदित हो जाता है। इसी तरह सात रंगो का जबरदस्त संगम इस संसार को सुंदर और रंगीन बना देता है।

शादी में सात फेरों के पीछे मान्यता है कि इससे विवाहित जोड़ों का जीवन सुखमय, आनंदित, सुंदर, व प्रेम सें सरोकार रहेगा।

ये सात वचन वधू द्वारा वर से मांगे जाते हैं। तत्पश्चात वधू अर्धांगिनी बनकर वर का जीवनभर साथ निभाने को तैयार जाती है। इसी समय एक वचन वर भी वधू सें लेने के बाद उसे अर्धांगिनी स्वीकार करने को तैयार हो जाती है।
ये सात वचन सुखी जीवन के आधार हैं और इनका पालन करना चाहिए।

यह सात फेरे व वचन अग्नि और ध्रुव तारा को साक्षी मानकर लिये जाते हैं. और माना जाता है कि इस पवित्र कार्य में वर के स्थान पर भगवान शिव तथा वधू के स्थिति पर माता पार्वती स्वयं विराजमान होते हैं, लेकिन संस्कृत में बोले जाने के कारण ये वचन अधिकतर वर व वधू दोनों को ही ठीक से समझ नहीं आते। इन्हें समझना बहुत जरूरी है, आज यहां हम इन सातों वचनों का अर्थ जानेंगे:-


1. तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी!।


(वधू वर सें पहला वचन मांगती है कि आप कभी तीर्थयात्रा पर जाएंगे तो मुझे भी अपने साथ लेकर जाएंगे। आप कोई भी धार्मिक कार्य करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। अगर आपको यह स्वीकार है तो मुझे आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार है।)


2. पुज्यो यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम!!


(वधू का दूसरा वचन यह है कि जैसे आपके माता-पिता आपके लिए पूजनीय हैं, वैसे ही आप मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुल की मर्यादानुसार दान धर्म करेंगे अगर आपको यह स्वीकार है तो ही मुझे आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार है।)


3. जीवनम अवस्थात्रये पालनां कुर्यात

वामांगंयामितदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृतीयं!!

(वधू तीसरा वचन यह मांगती है कि जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था) में आप मेरा पालन करते रहेंगे, अगर आपको यह स्वीकार है तो ही मुझे आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार है।)


4. कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थ:।।


(वधू चौथा वचन मांगती है कि अब आप विवाह के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे हैं तो परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दा‍यित्व आप ही के कंधों पर होगा। अगर आप इस दायित्व के निर्वहन करने का वचन दें तो ही मुझे आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार है।)


5. स्वसद्यकार्ये व्यहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्‍त्रयेथा

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या!!


(वधू पांचवें वचन में कहती है, कि हमारे घर के लेन-देन या अन्य किसी कार्य में खर्च करते समय यदि आप मुझसें भी विचार-विमर्श किया करेंगे तो ही मुझे आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार है।)


6. न मेपमानमं सविधे सखीना द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्वेत

वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम!!


(छठा वचन वधू मांगती है कि आप जुआ या अन्य किसी भी प्रकार की बुरी आदतों से दूर रहेंगे और अगर मैं अपनी सखियों या अन्य स्‍त्रियों के साथ बैठी हूं, तब उनके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। तो ही मुझे आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार है।) 


7. परस्त्रियं मातूसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कूर्या।

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तमंत्र कन्या!!

(सातवें वचन में वधू मांगती है कि पराई स्त्रियों को आप माता समान समझेंगे और पति-पत्नी के इस अटूट प्रेम के बीच अन्य किसी को भागीदार नहीं बनाएंगे। अगर आपको यह स्वीकार है तो ही मुझे आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार है।) 


इन वचनों के द्वारा वधू अपने भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास करती है।

copyrights Amritlife 2019,  All rights reserved.